Showing posts with label hindi. Show all posts
Showing posts with label hindi. Show all posts

Sunday, 9 August 2020

होम आयसोलेशन/स्व पृथक्करण भाग -३


       इसके पूर्व दो भागों में हमने स्व पृथक्करण कौन कर सकता है, वहाँ ती साफ-सफाई कैसे रखनी है, उसी प्रकार किन लक्षणों को गंभीरता से लेना है, इन सभी के बारे में जानकारी ली। 

*क्या केअरगिव्हर को भी स्व पृथक्करण करना चाहिए? *

• भारत में बहुत बार ऐसा देखा जाता है कि बीमार व्यक्ति का ध्यान परिवारजन ही रखते है। परंतु सद्यः परिस्थितिया ही कुछ ऐसी हो गई है कि लोगों को अकेले रहना पड़ रहा है। ऐसे कठिन समय में केअरगिव्हर ही एक बड़ा सहारा है। 


•  इस केअरगिव्हर को किसी प्रकार के शारीरिक रोगादि न हो। रोगी का ध्यान रखते समय तथा रोगी को सामान देते लेते समय, वह  रोगी से कम से कम संपर्क हो, इस बात की सावधानी बरतें। 


• यदि रोगी के कमरे में जाना ही पड़े तब ऐसी स्थिति में वह सोशल डिस्टंन्सिंग, मास्क पहनने के नियम आदि का कड़े रूप से पालन करे ही और कमरे की खिड़कियां भी खोल दे जिससे कमरा हवादार बना रहे। 


• इसके बावजूद लक्षण दिखाई देने पर या रोगी की आयसोलेशन कालावधि समाप्त हो जाने पर, सावधानी के तौर पर केअरगिव्हर यदि स्व-पृथक्करण करे तो यह उत्तम ही है। 


होम आयसोलेशन (स्व-पृथक्करण) एवं मानसिक स्वास्थ्य-


१. मन को बहलाने के अनेकों उपाय, आपको अनेकों ने बताए ही होंगे, अत: यहाँ मै उस विषय के बारे में कुछ नहीं कहती,(फिर भी इस विषय पर जानकारी प्राप्त करने हेतु लेख के अंत में दिए गए नंबर पर मेसेज कर सकते है। ) परंतु एक मुद्दे पर मै पुनः जोर देना चाहूँगी कि स्व-पृथक्कृत रोगी पहले से ही, इस बीमारी के बारे में नाना प्रकार की जानकारी पढ़कर घबराएं हुए होते है, उसपर यह अकेलापन उत्पीड़ित करता है। पर ऐसा होते हुए भी, यह पृथक्करण अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार की भावनाओं में बहकर इसे तोड़े नहीं। परिवारजन भी प्रत्यक्ष  मिलने के मोह को टालें। 


२. यदि आवश्यकता पड़े तो समुपदेशक की सहायता भी ले सकते है वरना हम वैद्य गण आपकी मदद के लिए है ही। 


३. आजकल लोग तंत्रज्ञान के कारण बहुत नजदीक आ गए है। विडियो कॉल्स जैसे प्रभावी माध्यम हमारे पास है, अत: समय निर्धारित कर, रिश्तेदार, मित्रजन समय निर्धारित कर कॉल कर संपर्क में रह सकते है। 


COVID 19 की चिकित्सा एवं आयुर्वेद:


१. हम वैद्यों को इस प्रश्न का बार-बार सामना करना पड़ता है और होम आयसोलेशन में समय गुजारनेवाला व्यक्ति इस बारे में सोचता ही है। 


२. आयुष मंत्रालय पर पहले ही दिन से, आरोग्य मंत्रालय एवं केंद्र सरकार के बीच समन्वय साँझे  हुए हैं। 


३. प्रारंभ में, आयुर्वेदीय वैद्यों को कोरोना संसर्ग का खतरा कम करने हेतु, व्याधिक्षमत्त्व उपचार (Immunity booster measures) करने की अनुमति दी गई। इसमें रोज करने जैसे १३ उपायों के साथ, दिनचर्या/ऋतुचर्या  अर्थात अपना आरोग्य उत्तम रखने हेतु, दिनक्रम किस प्रकार का होना चाहिए इस बारे में जानकारी दी गई थी। तद्नुसार बहुत से वैद्यों ने इन उपक्रमों का जनसामान्य में प्रचार एवं प्रसार किया। वैयक्तिक तौर पर कहें तो, समन्वय आयुर्वेद की ओर से हमने, आयुष मंत्रालय द्वारा निर्देशित सूची अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया। जिन्होंने इन उपक्रमों को विस्तार में जानने की इच्छा दिखाई उन्हें दिनचर्या-ऋतुचर्या के विषय में मार्गदर्शन भी किया। (डाएट अँड लाईफस्टाईल करेक्शन ) 


४. इसके बाद आयुष मंत्रालय ने उपचार के दूसरे चरण में क्वारंटीन और होम आयसोलेशन के रोगियों को, अलाक्षणिक या सौम्य लक्षणों से युक्त रोगियों के क्लिनिकल ट्रायल किए गए। केरल, दिल्ली, गुजरात इन राज्यों में सफलतापूर्वक यह ट्रायल्स संपन्न हुए और यह ट्रायल्स १००-२०० नहीं बल्कि ५०००-६००० रोगियों पर औषधोपचार किए गए। इन उपचारों की सफलता के बाद, चिकित्सा के मार्गदर्शक तत्त्व (*Treatment Guidelines for asymptomatic and mild symptomatic cases* ) घोषित किए गए। अब इन तत्वों के आधार पर देशभर के एवं उसी प्रकार महाराष्ट्र के भी अनेक वैद्यों ने अपने-अपने स्थान पर से ही,उपर्युक्त वर्गों के अनेक रोगियों की यशस्वी चिकित्सा कर रहे है। 


५. आयुर्वेद शास्त्रानुसार की जानेवाली चिकित्सा, एलोपैथी मूल की जानेवाली चिकित्सा से भिन्न है। उदा. साँस फूलने पर सदैव एक ही औषधि दी जाती है, ऐसा नहीं है। यहाँ रोगी की प्रकृति, व्याधि की प्रकृति (लक्षणानुसार) , अतः साँस फूलना इस लक्षणों में भी व्यक्तिनुसार दोष पृथक हो सकते है, इसका कारण *आयुर्वेदोक्त निदानपंचक पद्धति (pathogenesis & diagnosis) इन सभी का विचार करने के पश्चात ही प्रोटोकॉल्स निर्धारित किए जाते है। 


६.उसी प्रकार आगे कहे तो, आयुर्वेद शास्त्र में रसायन चिकित्सा कही गई है। रसायन अर्थात कायाकल्प (Rejuvenation)। किसी दीर्घकालीन या कोरोना जैसे तीव्रवेगी विकार से कोई व्यक्ति ठीक हुआ हो फिर भी उसके शरीर पर पूर्व विकार के दुष्परिणाम दिखाई देते ही है और अन्य लक्षण भी उत्पन्न हो सकते है। यह दुष्परिणाम कम करने के लिए कुछ औषधियाँ कही गई है जिन्हें रसायन संज्ञा दी गई है। परंतु इन औषधियों के लेने के पहले कई मुद्दों पर विचार करना होता है अतः यह औषधियाँ वैद्य की सलाह से ही ले। 


७. प्रारंभ से ही आयुर्वेदिक चिकित्सा लेनेवाले रोगियों की संख्या में, फिल्हाल काफी बढोत्तरी हो रही है। और समय पर चिकित्सा शुरू करने के कारण उपशय भी जल्दी मिल रहें हैं। 


८. एक महत्वपूर्ण बात यह कि इस करवाते समय व्हाट्सएप युनिवर्सिटी से सावधान रहें। फेसबुक/व्हाट्सएप के मेसेजेस् जिज्ञासावश पढ़ना अलग बात है पर उन मेसेजेस् के अनुसार स्वयं की चिकित्सा स्वयं करना कहाँ तक समझदारी है? 


९. कोरोना, चीनी षड्यंत्र है या अस्पतालों के पैसे ऐठनें की तरकीब, इस बारे में नमक-मिर्च लगा कर वाद-विवाद हो सकते है परन्तु सचमुच लक्षण होने पर वैद्यकीय सलाह न लेते हुए, इन मेसेजेस् के आधार पर केवल घरेलू नुस्खे आज़माना कहाँ तक समर्थनीय है। 


१०. आप के नज़दीक निश्चित ही कई  पंजीकृत अच्छे वैद्य हैं, उनकी सलाह अवश्य लें। झोलाछाप, ढोंगी एवं पदवी रहित वैद्यों से बचे। 

                समय पर निदान व उपचार किया जाए तो कोरोना पर विजय संभव है। इसलिए अपना समय बर्बाद न करें। चिंता न करें पर ध्यान अवश्य दें। आयोग हमेशा आप के साथ है। 

(समाप्त)

सूचना: वैद्य की सलाह लेते समय, वह शिक्षित एवं पंजीकृत वैद्य है इसकी तसल्ली कर ले। अपनी राय देने व शंका निरसन करने हेतु आप मुझे मेरे वैयक्तिक नंबर पर अथवा ई-मेल पर संपर्क कर सकते है । इसके आगे के लेख आनेवाले रविवार को सवेसे ब्लॉग पर उपलब्ध होंगे। यह लेख आपको वॉट्सऐप /ईमेल द्वारा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए नंबर पर मेसेज करे अथवा हमारा फेसबुक पेज को लाईक करें। 


https://m.facebook.com/drsnigdhasclinic/


डॉ. स्निग्धा चुरी-वर्तक. 

9870690689

अनुवादक: वैद्य प्रीति सिंह - म्हात्रे

अथर्व आयुर्वेद , पनवेल.

9821726815


प्रस्तुत लेख वैद्या स्निग्धा चुरी वर्तक ने  ०७ अगस्त २०२० को अपने ब्लॉग 

https://samanwayayurved.blogspot.com/2020/08/blog-post_9.html 

पर प्रकाशित किया था। लेख के सभी अधिकार लेखकाधीन है। लेख अन्यत्र शेयर करने हेतु कृपया लेख में किसी भी प्रकार का बदलाव न करें तथा लेखिका के नाम सहित शेयर करें। 

Thursday, 6 August 2020

होम आयसोलेशन / अलगाव कैसे बनाए - भाग 1.

 

            सद्यः परिस्थिति में  हमें बहुधा सुनाई देनेवाले शब्द जैसे 'संस्थात्मक पृथक्करण' (Institutional quarantine)  और ' होम आयसोलेशन'। इसमें से संस्थात्मक पृथक्करण से लगभग सभी परिचित है परंतु होम आयसोलेशन के बारे में बहुतों ने मुझे पूछा कि आखिर यह होम आयसोलेशन कैसे करना होता है? इसे कौन कर सकता है? कोरोनाग्रस्त रोगी होम आयसोलेशन के दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सा ले सकता है क्या? यह सभी सवाल हमारे मन में भी आते हैं, तो आइए आज हम इसे समझ लेते है। इस हफ्ते, इसके आगे के भाग भी उपलब्ध होंगे। और विषय तो अच्छी तरह से समझने के लिए पहले 'आयसोलेशन' और 'पृथक्करण' इन दो संज्ञाओं के बीच का अंतर समझ लेते है। 


*आयसोलेशन* - अर्थात संसर्गजन्य रोगग्रस्त रोगी को,स्वस्थ व्यक्ति  से अलग रखकर, उस पर औषधोपचार करना। 


*पृथक्करण* ( *Quarantine* ) -अर्थात संसर्गजन्य विषाणु या जीवाणु के संपर्क में आए व्यक्ति को अलग रखकर, यह देखना कि कहीं उसमें कोई लक्षण दिखाई देते है या नहीं यह देखना। क्वारंटीन यह आयसोलेशन का सौम्य प्रकार है। क्योंकि यहाँ पृथक्कृत  व्यक्ति रोग से ग्रस्त हो यह जरूरी नहीं। 


■ स्व पृथक्करण किसे करना चाहिए? 

१. ऐसे व्यक्ति जिनका Report positive आया हो परंतु कोई लक्षण ना हो (Asymptomatic Positives ) 


२.सौम्य से मध्यम स्वरूप के लक्षण जिनमें दिखे ऐसे रोगी


३.कोरोनाग्रस्त रोगी के संपर्क में आए व्यक्ति (Contacts) 

  जैसे की,

 ● Covid 19 रोगी के साथ एक ही घर में                       रहनेवाले परिवारजन

 ● ऐसे व्यक्ति जो कोरोनाग्रस्त रोगी के संपर्क में आए हो तब  PPE kit न इस्तेमाल किया हो/ PPE kit इस्तेमाल किया हो पर PPE kit खराब हुआ हो

● ऐसे व्यक्ति जो कोरोनाग्रस्त रोगी के १ मीटर से कम अंतर पर संपर्क में आए हो या जिन्हें कोरोनाग्रस्त रोगी के साथ एक बंद जगह, जैसे- विमान प्रवास, वाहन प्रवास या ऑफिस पर रहना पड़ा हो। 

● मेरा वैसे  यह मत है, जो मैं मेरे  patients को भी पहले से कहती आ रही हूँ और अभी के समय में जो जरूरी भी है, कि अन्य कारणों से भी होनेवाले सर्दी- खाँसी- बुखार की हालत में अन्य परिवारजनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। ऐसा करने से हमारे साथ रहनेवाले परिजनों, विशेषत: वृद्ध, संभाव्य परेशानियों से बच जाते है। 

बहुधा बार ऐसा होता है कि RT-PCR  टेस्ट का निष्कर्ष आने तक रोगी को पृथक न किया हो, तो ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित हो सकते है। 


४. सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि कोरोना इन्फेक्शन कोई लज्जास्पद बात नहीं जो आप इसे सबसे छिपाते फिरे। बल्कि शुरूआत से ही लक्षण दिखाई देने पर योग्य औषधि उपचार के साथ स्वयं को पृथक्कृत करें और पूर्ण विश्राम ले, जिससे जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी। 


■ *स्व पृथक्करण कौन नहीं कर सकता* ? 


‌● ऐसे रोगी जिनकी प्रतिकारशक्ति कम हो, उदा. जो कैन्सर के रोगी हो और उसकी चिकित्सा ले रहे हो 

● ‌या जिनकी अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रान्स प्लांट) की शस्त्रक्रिया हुई हो और संबंधित औषधियाँ ले रहे हो

● ‌ HIV का रोगी हो

क्योंकि उपर्युक्त सभी उदाहरणों में प्रतिकार शक्ति कम हो जाती है। ऑर्गन ट्रान्स प्लांट किए जाने पर शरीर द्वारा अस्वीकृत ना हो इसलिए रोगी की प्रतिकारशक्ति कम करने की दवाईयां दी जाती है। और इस दौरान कोई अन्य इन्फेक्शन हो जाए तो मुश्किल हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की निगरानी में रहना उत्तम होता है। 

● ६० वर्ष से अधिक आयु के ज्येष्ठ नागरिक, साथ ही उच्च रक्तचाप (High BP) , मधुमेह, हृदयविकार, फुफ्फुस-यकृत-वृक्क संबंधित विकार जिन्हें हो, मस्तिष्क संबंधित विकार जिन्हें हो(इन्हें को-मोर्बिड स्थिति कहते है) ऐसे व्यक्ति स्व पृथक्करण करने के पहले सभी नियम, स्व शरीर स्थिति अपने डॉक्टर से अच्छी तरह जाँच कराकर उनकी सहायता से ही स्व पृथक्करण करने का निर्णय ले। 


■ *स्व पृथक्करण कितने दिन करें* ? 


अपने डॉक्टर के निर्देश के अनुसार १४ से १७ दिनों तक स्व पृथक्करण करे क्योंकि किसी कोरोनाग्रस्त रोगी के संपर्क में आने पर साधारणत: १४ दिनों में लक्षण दिख सकते है। उसी प्रकार इन्स्टिट्यूटशनल आयसोलेशन में रुके व्यक्तियों में भी यदि १० दिनों तक लक्षणों में वृद्धि न हो और आखिर के ३ दिनों में बुखार भी न आया हो तो उन्हें छुट्टी मिल सकती है, केवल वह व्यक्ति घर में आगे के  ७ दिन स्व पृथक्करणकर, खुद के लक्षणों का निरीक्षण करें। 


सूचना: वैद्य की सलाह लेते समय, वह शिक्षित एवं पंजीकृत वैद्य है इसकी तसल्ली कर ले। अपनी राय देने व शंका निरसन करने हेतु आप मुझे मेरे वैयक्तिक नंबर पर अथवा ई-मेल पर संपर्क कर सकते है ।यह विषय के 3 भाग आज से हररोज प्रकाशित किये जाऐंगे। इसके आगे के लेख हर रविवार को सवेरे ब्लॉग पर उपलब्ध होंगे। यह लेख आपको वॉट्सऐप /ईमेल द्वारा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए नंबर पर मेसेज करे अथवा हमारा फेसबुक पेज लाईक करें। 

https://m.facebook.com/drsnigdhasclinic/



लेखक,

डॉ. स्निग्धा चुरी-वर्तक. 

9870690689

samanwayaayurveda@gmail.com 

हिंदी अनुवाद-

अनुवादक : वैद्य प्रीति सिंह - म्हात्रे.

अथर्व आयुर्वेद,पनवेल.


प्रस्तुत लेख वैद्या स्निग्धा चुरी वर्तक ने  ०६ अगस्त २०२० को अपने ब्लॉग 

**

पर प्रकाशित किया था। लेख के सभी अधिकार लेखकाधीन है। लेख अन्यत्र शेयर करने हेतु कृपया लेख में किसी भी प्रकार का बदलाव न करें तथा लेखिका के नाम सहित शेयर करें।