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Sunday, 9 August 2020

होम आयसोलेशन/स्व पृथक्करण भाग -३


       इसके पूर्व दो भागों में हमने स्व पृथक्करण कौन कर सकता है, वहाँ ती साफ-सफाई कैसे रखनी है, उसी प्रकार किन लक्षणों को गंभीरता से लेना है, इन सभी के बारे में जानकारी ली। 

*क्या केअरगिव्हर को भी स्व पृथक्करण करना चाहिए? *

• भारत में बहुत बार ऐसा देखा जाता है कि बीमार व्यक्ति का ध्यान परिवारजन ही रखते है। परंतु सद्यः परिस्थितिया ही कुछ ऐसी हो गई है कि लोगों को अकेले रहना पड़ रहा है। ऐसे कठिन समय में केअरगिव्हर ही एक बड़ा सहारा है। 


•  इस केअरगिव्हर को किसी प्रकार के शारीरिक रोगादि न हो। रोगी का ध्यान रखते समय तथा रोगी को सामान देते लेते समय, वह  रोगी से कम से कम संपर्क हो, इस बात की सावधानी बरतें। 


• यदि रोगी के कमरे में जाना ही पड़े तब ऐसी स्थिति में वह सोशल डिस्टंन्सिंग, मास्क पहनने के नियम आदि का कड़े रूप से पालन करे ही और कमरे की खिड़कियां भी खोल दे जिससे कमरा हवादार बना रहे। 


• इसके बावजूद लक्षण दिखाई देने पर या रोगी की आयसोलेशन कालावधि समाप्त हो जाने पर, सावधानी के तौर पर केअरगिव्हर यदि स्व-पृथक्करण करे तो यह उत्तम ही है। 


होम आयसोलेशन (स्व-पृथक्करण) एवं मानसिक स्वास्थ्य-


१. मन को बहलाने के अनेकों उपाय, आपको अनेकों ने बताए ही होंगे, अत: यहाँ मै उस विषय के बारे में कुछ नहीं कहती,(फिर भी इस विषय पर जानकारी प्राप्त करने हेतु लेख के अंत में दिए गए नंबर पर मेसेज कर सकते है। ) परंतु एक मुद्दे पर मै पुनः जोर देना चाहूँगी कि स्व-पृथक्कृत रोगी पहले से ही, इस बीमारी के बारे में नाना प्रकार की जानकारी पढ़कर घबराएं हुए होते है, उसपर यह अकेलापन उत्पीड़ित करता है। पर ऐसा होते हुए भी, यह पृथक्करण अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार की भावनाओं में बहकर इसे तोड़े नहीं। परिवारजन भी प्रत्यक्ष  मिलने के मोह को टालें। 


२. यदि आवश्यकता पड़े तो समुपदेशक की सहायता भी ले सकते है वरना हम वैद्य गण आपकी मदद के लिए है ही। 


३. आजकल लोग तंत्रज्ञान के कारण बहुत नजदीक आ गए है। विडियो कॉल्स जैसे प्रभावी माध्यम हमारे पास है, अत: समय निर्धारित कर, रिश्तेदार, मित्रजन समय निर्धारित कर कॉल कर संपर्क में रह सकते है। 


COVID 19 की चिकित्सा एवं आयुर्वेद:


१. हम वैद्यों को इस प्रश्न का बार-बार सामना करना पड़ता है और होम आयसोलेशन में समय गुजारनेवाला व्यक्ति इस बारे में सोचता ही है। 


२. आयुष मंत्रालय पर पहले ही दिन से, आरोग्य मंत्रालय एवं केंद्र सरकार के बीच समन्वय साँझे  हुए हैं। 


३. प्रारंभ में, आयुर्वेदीय वैद्यों को कोरोना संसर्ग का खतरा कम करने हेतु, व्याधिक्षमत्त्व उपचार (Immunity booster measures) करने की अनुमति दी गई। इसमें रोज करने जैसे १३ उपायों के साथ, दिनचर्या/ऋतुचर्या  अर्थात अपना आरोग्य उत्तम रखने हेतु, दिनक्रम किस प्रकार का होना चाहिए इस बारे में जानकारी दी गई थी। तद्नुसार बहुत से वैद्यों ने इन उपक्रमों का जनसामान्य में प्रचार एवं प्रसार किया। वैयक्तिक तौर पर कहें तो, समन्वय आयुर्वेद की ओर से हमने, आयुष मंत्रालय द्वारा निर्देशित सूची अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया। जिन्होंने इन उपक्रमों को विस्तार में जानने की इच्छा दिखाई उन्हें दिनचर्या-ऋतुचर्या के विषय में मार्गदर्शन भी किया। (डाएट अँड लाईफस्टाईल करेक्शन ) 


४. इसके बाद आयुष मंत्रालय ने उपचार के दूसरे चरण में क्वारंटीन और होम आयसोलेशन के रोगियों को, अलाक्षणिक या सौम्य लक्षणों से युक्त रोगियों के क्लिनिकल ट्रायल किए गए। केरल, दिल्ली, गुजरात इन राज्यों में सफलतापूर्वक यह ट्रायल्स संपन्न हुए और यह ट्रायल्स १००-२०० नहीं बल्कि ५०००-६००० रोगियों पर औषधोपचार किए गए। इन उपचारों की सफलता के बाद, चिकित्सा के मार्गदर्शक तत्त्व (*Treatment Guidelines for asymptomatic and mild symptomatic cases* ) घोषित किए गए। अब इन तत्वों के आधार पर देशभर के एवं उसी प्रकार महाराष्ट्र के भी अनेक वैद्यों ने अपने-अपने स्थान पर से ही,उपर्युक्त वर्गों के अनेक रोगियों की यशस्वी चिकित्सा कर रहे है। 


५. आयुर्वेद शास्त्रानुसार की जानेवाली चिकित्सा, एलोपैथी मूल की जानेवाली चिकित्सा से भिन्न है। उदा. साँस फूलने पर सदैव एक ही औषधि दी जाती है, ऐसा नहीं है। यहाँ रोगी की प्रकृति, व्याधि की प्रकृति (लक्षणानुसार) , अतः साँस फूलना इस लक्षणों में भी व्यक्तिनुसार दोष पृथक हो सकते है, इसका कारण *आयुर्वेदोक्त निदानपंचक पद्धति (pathogenesis & diagnosis) इन सभी का विचार करने के पश्चात ही प्रोटोकॉल्स निर्धारित किए जाते है। 


६.उसी प्रकार आगे कहे तो, आयुर्वेद शास्त्र में रसायन चिकित्सा कही गई है। रसायन अर्थात कायाकल्प (Rejuvenation)। किसी दीर्घकालीन या कोरोना जैसे तीव्रवेगी विकार से कोई व्यक्ति ठीक हुआ हो फिर भी उसके शरीर पर पूर्व विकार के दुष्परिणाम दिखाई देते ही है और अन्य लक्षण भी उत्पन्न हो सकते है। यह दुष्परिणाम कम करने के लिए कुछ औषधियाँ कही गई है जिन्हें रसायन संज्ञा दी गई है। परंतु इन औषधियों के लेने के पहले कई मुद्दों पर विचार करना होता है अतः यह औषधियाँ वैद्य की सलाह से ही ले। 


७. प्रारंभ से ही आयुर्वेदिक चिकित्सा लेनेवाले रोगियों की संख्या में, फिल्हाल काफी बढोत्तरी हो रही है। और समय पर चिकित्सा शुरू करने के कारण उपशय भी जल्दी मिल रहें हैं। 


८. एक महत्वपूर्ण बात यह कि इस करवाते समय व्हाट्सएप युनिवर्सिटी से सावधान रहें। फेसबुक/व्हाट्सएप के मेसेजेस् जिज्ञासावश पढ़ना अलग बात है पर उन मेसेजेस् के अनुसार स्वयं की चिकित्सा स्वयं करना कहाँ तक समझदारी है? 


९. कोरोना, चीनी षड्यंत्र है या अस्पतालों के पैसे ऐठनें की तरकीब, इस बारे में नमक-मिर्च लगा कर वाद-विवाद हो सकते है परन्तु सचमुच लक्षण होने पर वैद्यकीय सलाह न लेते हुए, इन मेसेजेस् के आधार पर केवल घरेलू नुस्खे आज़माना कहाँ तक समर्थनीय है। 


१०. आप के नज़दीक निश्चित ही कई  पंजीकृत अच्छे वैद्य हैं, उनकी सलाह अवश्य लें। झोलाछाप, ढोंगी एवं पदवी रहित वैद्यों से बचे। 

                समय पर निदान व उपचार किया जाए तो कोरोना पर विजय संभव है। इसलिए अपना समय बर्बाद न करें। चिंता न करें पर ध्यान अवश्य दें। आयोग हमेशा आप के साथ है। 

(समाप्त)

सूचना: वैद्य की सलाह लेते समय, वह शिक्षित एवं पंजीकृत वैद्य है इसकी तसल्ली कर ले। अपनी राय देने व शंका निरसन करने हेतु आप मुझे मेरे वैयक्तिक नंबर पर अथवा ई-मेल पर संपर्क कर सकते है । इसके आगे के लेख आनेवाले रविवार को सवेसे ब्लॉग पर उपलब्ध होंगे। यह लेख आपको वॉट्सऐप /ईमेल द्वारा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए नंबर पर मेसेज करे अथवा हमारा फेसबुक पेज को लाईक करें। 


https://m.facebook.com/drsnigdhasclinic/


डॉ. स्निग्धा चुरी-वर्तक. 

9870690689

अनुवादक: वैद्य प्रीति सिंह - म्हात्रे

अथर्व आयुर्वेद , पनवेल.

9821726815


प्रस्तुत लेख वैद्या स्निग्धा चुरी वर्तक ने  ०७ अगस्त २०२० को अपने ब्लॉग 

https://samanwayayurved.blogspot.com/2020/08/blog-post_9.html 

पर प्रकाशित किया था। लेख के सभी अधिकार लेखकाधीन है। लेख अन्यत्र शेयर करने हेतु कृपया लेख में किसी भी प्रकार का बदलाव न करें तथा लेखिका के नाम सहित शेयर करें। 

*होम आयसोलेशन* / *स्व पृथक्करण भाग* -२

 

          कल हमने  देखा,आयसोलेशन एवं क्वारंटीन इन दोनों के बीच का अंतर , कौन कर सकता है, कौन नहीं कर सकता और मकितने दिनों तक कर सकता है इस विषय के बारे में जानकारी ली। आज देखते है भाग -२


■ *स्व-पृथक्करण करते समय कौनसी सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है* ? 


● सर्वप्रथम घर में *स्वतंत्र टॉयलेट-बाथरुम संलग्न एक कमरा* होना जरूरी है। (Master bedroom) 


●  स्व-पृथक्करण कर रहे रोगी की *२४ घंटे देखभाल करने के लिए एक केअरटेकर* का होना जरूरी है। यह केअरटेकर घर का कोई सदस्य /पड़ोसी या व्यावसायिक रूप से केअरटेकिंग जिनका पेशा हो, ऐसे व्यक्ति भी हो सकते हैं, केवल शर्त यह कि रोगी के लिए *वह २४ x ७ उपलब्ध* रहे। और यह काम कोई भी *एक ही व्यक्ति* करे, अनायास एक से अधिक व्यक्तियों का संपर्क न होने दे। 


●रोगी , केअरटेकर  और अस्पताल इनमें ताल-मेल अच्छा रहे और सतत संपर्क में रहे। 


● रोगी के केअरटेकर के पास PPE किट, कम से कम  ३ ply mask एवं ग्लोव्हज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो। 


● रोगी, रोज आत्मपरीक्षण करता रहे और वैद्यकीय अधिकारियों को सूचित करता रहे। 


● आत्मपरीक्षण करने हेतु रोगी के पास एक तापमापी ( थर्मामीटर), एक पल्सऑक्सीमीटर हो जिससे वह अपने तापमान व रक्त में ऑक्सीजन के प्रतिशत को नियमित रूप से जाँचते रहे। (एक वैद्य की भूमिका से मेरा यह मत है कि, यह बहुपयोगी हो सकता है।) 



■ *निम्नलिखित लक्षणों के प्रति सजग रहें*


१.बुखार / खॉसी

२.सास लेने में तकलीफ होना

३.छाती भारी लगना या वहा वेदना होना

४.रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम होना (इसके लिए पल्सऑक्सीमीटर का होना आवश्यक है) 

५.अनुत्साही महसूस होना

६.भ्रमित प्रतीत होना

७.चक्कर आना

८.बहुत थकान महसूस होना

९़ओंठो पर या चेहरे पर नीली छाही दिखना

१०. साँस फूलना

११. *Happy hypoxia syndrome*  ( *हॅपी हायपॉक्सिया सिंड्रोम* ) -  यह संज्ञा आप में से किसी ने कभी कहीं पढ़ी या सुनी है? कुछ COVID ग्रस्त रोगियों में यह लक्षण दिखाई देता है। हायपॉक्सिया अर्थात रक्त में कम हुआ ऑक्सीजन का स्तर। सरल शब्दों में कहें तो *हमारे शारीरिक अवयवों को आवश्यक ऑक्सीजन का प्रवाह न हो पाने का यह लक्षण* है। यह ज्यादा होने पर उपर्युक्त लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। परंतु  

हॅपी हायपॉक्सिया इस अवस्था में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते। इसके विपरीत रोगी बिना किसी तकलीफ के अपने नियमित काम करता रहता है। परंतु *ऑक्सीजन का स्तर शरीर में कम होने से अवयवों पर तनाव* जरूर पड़ता है जिससे अचानक ही गंभीर स्थिति निर्माण हो सकती है। ऐसा होता क्यों है यह निश्चित रूप से कहा नहीं जा सकता पर यह वस्तुस्थिति दिखाई अवश्य देती है

        इसी कारण पल्सऑक्सीमीटर जैसे यंत्रो का उपयोग कर अपने ऑक्सीजन का स्तर जाँचते रहे। 


■ स्व-पृथक्करण करते समय कौन-सी सावधानियां बरतें? 


●  रोगी घर में भी मास्क पहनें। केवल कमरे में अकेले रहने पर ही मास्क निकाल सकता है। अन्यथा कमरे में किसी और की उपस्थिति में मास्क पहनना अनिवार्य है। हर ६-८ घंटे में मास्क बदले। भीगनें /खराब होने पर तुरंत बदले। 


●  रोगी की सभी वस्तुएँ अलग रखें। ( बिस्तर, चादर, टॉवेल,नॅपकिन, रूमाल, कपड़े, खाने के बर्तन, पानी का जग आदि) 


● रोग के लक्षण न होने पर संभवतः रोगी स्वयं के हलके-फुलके काम स्वयं ही करे। इससे उसका मन भी बहला रहता है। (नियमित दिनचर्या पालन के साथ लक्षणों का भी निरीक्षण करते रहे।) 


● रोगी अपने कपड़े स्वयं ही धोकर उसे निर्जंतुक करे और कमरे में एक ओर सुखाएं। 


● उसी प्रकार रोगी अपने बर्तन भी स्वयं ही मांजे।


● रोगी के लक्षण अधिक अथवा तीव्र दिखाई देने पर अथवा स्वयं के काम स्वयं करना संभव न होने पर वह अपने कपड़े और बर्तन १% सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल में अलग - अलग भीगो कर रखें। इस प्रकार से केअरटेकर कुछ देर बाद ऊन कपड़े-बर्तन को धो सकता है। 


● रोगी के कपड़े-बर्तन धोते समय केअरटेकर PPE किट को पहन कर ही काम करे। 


● रोगी के कमरे की साफ-सफाई करने भी केअरटेकर PPE किट पहन कर ही जाए। 


● PPE किट पहनने से पहले और निकालने के पश्चात ४० सेकंड तक हाथों को साबुन से धोएं। 


● इस्तेमाल किए हुए मास्क, PPE किट को १% सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल में कुछ देर भिगो कर फिर एक गहरे गढ्ढे में गाड़ दे या जला दे। (ऐसा करना जरूरी है क्योंकि कई बार ऐसा देखा सुना जाता है कि इस्तेमाल किए हुए मास्क आदि पुनः बेचे जाते है।) 


● कमरा साफ करते समय फर्श, दरवाजे की कड़ी-कुंडी (handle) जंतुनाशक साबुन से (१% सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल) धोकर पोंछ ले। 


● रोगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पल्सऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, उसका मोबाईल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अल्कोहल युक्त सॅनिटायझर से पोंछ ले। 


●  बिस्तर-चादर को झटके नहीं। 


● रोगी का कूड़ा-कचड़ा अलग ही रखें। उसे घर के अन्य दैनंदिन कचड़े में ना मिलाएं। 


● संभवतः यह कचड़ा एक थैली में बांधकर, फिर उसे एक अन्य थैली में बांधे। और आखिर में यह कचड़ा एक पीली थैली में बांधे। जिस प्रकार से गीला कचड़ा हरे और सूखा कचड़ा नीली थैली में देना होता है उसी प्रकार COVID ग्रस्त रोगी का कचड़ा पीली थैली में दिया जाता है। ऐसा करना हमारे, हमारे पड़ोसियों तथा सफाई कर्मचारियों के  सुरक्षा के हित में होता है। 


●  स्व-पृथक्करण अपने ही घर में किया जा रहा है फिर भी उसके सभी नियमों का गंभीरता से पालन करें। इन नियो को तोड़ कर अन्य लोगों से मिले-जुले नहीं, अपने घरवालों से भी नहीं। (रोगी की हालचाल पूछने हेतु भी, रोगी के पृथक्कृत कमरे में न जाए।) 


●  घर में अकेले रह रहे हो तब भी औषधि या सामान लाने घर के बाहर  न जाए। 

(क्रमशः)


सूचना: वैद्य की सलाह लेते समय, वह शिक्षित एवं पंजीकृत वैद्य है इसकी तसल्ली कर ले। अपनी राय देने व शंका निरसन करने हेतु आप मुझे मेरे वैयक्तिक नंबर पर अथवा ई-मेल पर संपर्क कर सकते है । इसके आगे के लेख आनेवाले रविवार को सवेसे ब्लॉग पर उपलब्ध होंगे। यह लेख आपको वॉट्सऐप /ईमेल द्वारा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए नंबर पर मेसेज करे अथवा हमारा फेसबुक पेज को लाईक करें। 


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डॉ. स्निग्धा चुरी-वर्तक. 

9870690689

अनुवादक: वैद्य प्रीति सिंह - म्हात्रे

अथर्व आयुर्वेद , पनवेल.

9821726815


प्रस्तुत लेख वैद्या स्निग्धा चुरी वर्तक ने  ०९ अगस्त २०२० को अपने ब्लॉग 

*https://samanwayayurved.blogspot.com/2020/07/blog-post_26.html?m=0*

पर प्रकाशित किया था। लेख के सभी अधिकार लेखकाधीन है। लेख अन्यत्र शेयर करने हेतु कृपया लेख में किसी भी प्रकार का बदलाव न करें तथा लेखिका के नाम सहित शेयर करें। 

Thursday, 6 August 2020

होम आयसोलेशन / अलगाव कैसे बनाए - भाग 1.

 

            सद्यः परिस्थिति में  हमें बहुधा सुनाई देनेवाले शब्द जैसे 'संस्थात्मक पृथक्करण' (Institutional quarantine)  और ' होम आयसोलेशन'। इसमें से संस्थात्मक पृथक्करण से लगभग सभी परिचित है परंतु होम आयसोलेशन के बारे में बहुतों ने मुझे पूछा कि आखिर यह होम आयसोलेशन कैसे करना होता है? इसे कौन कर सकता है? कोरोनाग्रस्त रोगी होम आयसोलेशन के दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सा ले सकता है क्या? यह सभी सवाल हमारे मन में भी आते हैं, तो आइए आज हम इसे समझ लेते है। इस हफ्ते, इसके आगे के भाग भी उपलब्ध होंगे। और विषय तो अच्छी तरह से समझने के लिए पहले 'आयसोलेशन' और 'पृथक्करण' इन दो संज्ञाओं के बीच का अंतर समझ लेते है। 


*आयसोलेशन* - अर्थात संसर्गजन्य रोगग्रस्त रोगी को,स्वस्थ व्यक्ति  से अलग रखकर, उस पर औषधोपचार करना। 


*पृथक्करण* ( *Quarantine* ) -अर्थात संसर्गजन्य विषाणु या जीवाणु के संपर्क में आए व्यक्ति को अलग रखकर, यह देखना कि कहीं उसमें कोई लक्षण दिखाई देते है या नहीं यह देखना। क्वारंटीन यह आयसोलेशन का सौम्य प्रकार है। क्योंकि यहाँ पृथक्कृत  व्यक्ति रोग से ग्रस्त हो यह जरूरी नहीं। 


■ स्व पृथक्करण किसे करना चाहिए? 

१. ऐसे व्यक्ति जिनका Report positive आया हो परंतु कोई लक्षण ना हो (Asymptomatic Positives ) 


२.सौम्य से मध्यम स्वरूप के लक्षण जिनमें दिखे ऐसे रोगी


३.कोरोनाग्रस्त रोगी के संपर्क में आए व्यक्ति (Contacts) 

  जैसे की,

 ● Covid 19 रोगी के साथ एक ही घर में                       रहनेवाले परिवारजन

 ● ऐसे व्यक्ति जो कोरोनाग्रस्त रोगी के संपर्क में आए हो तब  PPE kit न इस्तेमाल किया हो/ PPE kit इस्तेमाल किया हो पर PPE kit खराब हुआ हो

● ऐसे व्यक्ति जो कोरोनाग्रस्त रोगी के १ मीटर से कम अंतर पर संपर्क में आए हो या जिन्हें कोरोनाग्रस्त रोगी के साथ एक बंद जगह, जैसे- विमान प्रवास, वाहन प्रवास या ऑफिस पर रहना पड़ा हो। 

● मेरा वैसे  यह मत है, जो मैं मेरे  patients को भी पहले से कहती आ रही हूँ और अभी के समय में जो जरूरी भी है, कि अन्य कारणों से भी होनेवाले सर्दी- खाँसी- बुखार की हालत में अन्य परिवारजनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। ऐसा करने से हमारे साथ रहनेवाले परिजनों, विशेषत: वृद्ध, संभाव्य परेशानियों से बच जाते है। 

बहुधा बार ऐसा होता है कि RT-PCR  टेस्ट का निष्कर्ष आने तक रोगी को पृथक न किया हो, तो ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित हो सकते है। 


४. सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि कोरोना इन्फेक्शन कोई लज्जास्पद बात नहीं जो आप इसे सबसे छिपाते फिरे। बल्कि शुरूआत से ही लक्षण दिखाई देने पर योग्य औषधि उपचार के साथ स्वयं को पृथक्कृत करें और पूर्ण विश्राम ले, जिससे जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी। 


■ *स्व पृथक्करण कौन नहीं कर सकता* ? 


‌● ऐसे रोगी जिनकी प्रतिकारशक्ति कम हो, उदा. जो कैन्सर के रोगी हो और उसकी चिकित्सा ले रहे हो 

● ‌या जिनकी अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रान्स प्लांट) की शस्त्रक्रिया हुई हो और संबंधित औषधियाँ ले रहे हो

● ‌ HIV का रोगी हो

क्योंकि उपर्युक्त सभी उदाहरणों में प्रतिकार शक्ति कम हो जाती है। ऑर्गन ट्रान्स प्लांट किए जाने पर शरीर द्वारा अस्वीकृत ना हो इसलिए रोगी की प्रतिकारशक्ति कम करने की दवाईयां दी जाती है। और इस दौरान कोई अन्य इन्फेक्शन हो जाए तो मुश्किल हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की निगरानी में रहना उत्तम होता है। 

● ६० वर्ष से अधिक आयु के ज्येष्ठ नागरिक, साथ ही उच्च रक्तचाप (High BP) , मधुमेह, हृदयविकार, फुफ्फुस-यकृत-वृक्क संबंधित विकार जिन्हें हो, मस्तिष्क संबंधित विकार जिन्हें हो(इन्हें को-मोर्बिड स्थिति कहते है) ऐसे व्यक्ति स्व पृथक्करण करने के पहले सभी नियम, स्व शरीर स्थिति अपने डॉक्टर से अच्छी तरह जाँच कराकर उनकी सहायता से ही स्व पृथक्करण करने का निर्णय ले। 


■ *स्व पृथक्करण कितने दिन करें* ? 


अपने डॉक्टर के निर्देश के अनुसार १४ से १७ दिनों तक स्व पृथक्करण करे क्योंकि किसी कोरोनाग्रस्त रोगी के संपर्क में आने पर साधारणत: १४ दिनों में लक्षण दिख सकते है। उसी प्रकार इन्स्टिट्यूटशनल आयसोलेशन में रुके व्यक्तियों में भी यदि १० दिनों तक लक्षणों में वृद्धि न हो और आखिर के ३ दिनों में बुखार भी न आया हो तो उन्हें छुट्टी मिल सकती है, केवल वह व्यक्ति घर में आगे के  ७ दिन स्व पृथक्करणकर, खुद के लक्षणों का निरीक्षण करें। 


सूचना: वैद्य की सलाह लेते समय, वह शिक्षित एवं पंजीकृत वैद्य है इसकी तसल्ली कर ले। अपनी राय देने व शंका निरसन करने हेतु आप मुझे मेरे वैयक्तिक नंबर पर अथवा ई-मेल पर संपर्क कर सकते है ।यह विषय के 3 भाग आज से हररोज प्रकाशित किये जाऐंगे। इसके आगे के लेख हर रविवार को सवेरे ब्लॉग पर उपलब्ध होंगे। यह लेख आपको वॉट्सऐप /ईमेल द्वारा प्राप्त करने हेतु नीचे दिए नंबर पर मेसेज करे अथवा हमारा फेसबुक पेज लाईक करें। 

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लेखक,

डॉ. स्निग्धा चुरी-वर्तक. 

9870690689

samanwayaayurveda@gmail.com 

हिंदी अनुवाद-

अनुवादक : वैद्य प्रीति सिंह - म्हात्रे.

अथर्व आयुर्वेद,पनवेल.


प्रस्तुत लेख वैद्या स्निग्धा चुरी वर्तक ने  ०६ अगस्त २०२० को अपने ब्लॉग 

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पर प्रकाशित किया था। लेख के सभी अधिकार लेखकाधीन है। लेख अन्यत्र शेयर करने हेतु कृपया लेख में किसी भी प्रकार का बदलाव न करें तथा लेखिका के नाम सहित शेयर करें। 

Saturday, 1 August 2020

होम आयसोलेशन /घरीच स्वविलगिकरण FAQs अर्थातच वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न.


मागच्याच आठवड्यात प्रसिद्ध झालेल्या घरीच स्वविलगिकरण कसे करावे या तीन भागांच्या लेखमालेला आपण भरभरून प्रतिसाद दिलात, प्रश्नही विचारलेत. यातील काही प्रश्न बऱ्याचदा विचारले गेलेत म्हणून त्यांची सत्वर उत्तरे देते आहे.

  1. हॉस्पिटलमध्ये असताना आयुर्वेदिक औषधे घेऊ शकतो का? ©samanwayaDrSnigdha

हो. रुग्ण एक संमतीपत्र (Consent form) भरून देऊ शकतात. सध्या पूरक चिकित्सा म्हणून आयुर्वेद चिकित्सेला मान्यता आहे. यासाठी हॉस्पिटलचे वैद्यकीय अधिकारी आणि उपचार करणारे वैद्य यांच्यात समन्वय असायला हवा. अलाक्षणिक तसेच सौम्य आणि मध्यम स्वरूपाची लक्षणे असलेल्या रुग्णांमध्ये खूप छान प्रतिसादही मिळत आहे.हा लेख लिहीत असताना दि.०१ऑगस्ट रोजी प्रसिद्ध झालेल्या बातमीनुसार ऑल इंडिया इन्स्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, दिल्ली येथे एप्रिल महिन्यापासून चालू असलेल्या ट्रायलचे निकाल अतिशय सकारात्मक आले आहेत. अधिक माहितीसाठी कृपया भाग 3 मधील सविस्तर उत्तर वाचावे.


  1. पल्स ऑक्सिमीटर चे ऍप चालू शकेल का?

या ऍपविषयी सोशल मीडियावर बराच गदारोळ झाला. आता त्यातील फिंगरप्रिंट चोरीला जाण्याच्या तांत्रिक मुद्द्यांवर त्या क्षेत्रातील तज्ञांनी भाष्य केलेच आहे. त्यामुळे मी माझ्या वैद्यकीय क्षेत्रापुरते सांगते. ©samanwayaDrSnigdha

 तर पल्स ऑक्सिमीटर हे छोटेसे चिमट्यासारखे उपकरण असते. जे बोटाच्या चिमट्याप्रमाणेच लावतात. यातील प्रकाश सेन्सर्स (LED light sensors)च्या साहाय्याने रक्तातील ऑक्सिजनचे प्रमाण मोजले जाते.ऍपमध्ये कॅमेराचा फ्लॅश लाईट वापरुन हे प्रमाण मोजले जाते. हे ऍपने दाखवले जाणारे प्रमाण दरवेळी अचूक असेलच असे नाही.आम्ही ऍपद्वारे आणि त्यांनंतर पल्स ऑक्सिमीटर,BP तपासायचे यंत्र तसेच स्टेथोस्कोपने, ऑक्सिजन,BP आणि श्वसनाचा वेग मोजला दरवेळी त्यात थोडीफार तफावत आली. त्यामुळे औषधोपचारांसाठी जर आपण ऑक्सिजनचे प्रमाण बघत असू तर ते अचूकच असायला हवे. 

पल्सऑक्सिमीटर न टोचता, रक्त घेता हे प्रमाण मोजतात,हलके,वापरायला सोपे असतात. त्यामुळे रुग्णांनी तरी ते जरूर वापरावे.

तसेच पल्स ऑक्सिमीटर वापरण्यापूर्वी नेलपेंट,मेंदी यासारखी रंगद्रव्ये टाळावीत. त्यामुळे प्रकाश वाहनाला अडथळा होऊ शकतो.

©samanwayaDrSnigdha

  1. कोण करणार हे सगळं?खूप कठीण आहे.

मान्य आहे की ही नवीन तडजोड कठीण आहे. घरच्या व्यक्ती, केअर गिव्हर्सवर थोडा ताणही येईल पण ते गरजेचे आहे.वेळीच केलेले आयसोलेशन आजाराचा पुढील प्रसार रोखू शकेल. बरं हे आयसोलेशन करण्यात काही अडचणी येत असतील तर जवळच्या डॉक्टरांना जरूर विचारा,ते नक्कीच शंकानिरसन करतील.

उदा. गरम पाण्यासाठी किटली,मधल्या वेळेचा हलका खाऊ म्हणून लाह्या,वाफेचे यंत्र रुग्णाच्या खोलीतच नेऊन ठेवले तर ते दररोज पुरवण्याचा ताण केअरगिव्हरवर येणार नाही. अलाक्षणिक रुग्ण इंडक्शनवर स्वतःचा नाश्ताही बनवून घेऊ शकतील.


  1. घरी स्वतंत्र टॉयलेट किंवा वेगळी खोली नाही.

असे असल्यास लक्षणे असलेल्या रुग्णांना घरीच स्वविलगिकरणाची परवानगी स्थानिक अधिकारी देणार नाहीत. ◆पण थोडासा सर्दी-खोकला किंवा ताप आल्यास टेस्ट करायच्याही आधी पहिल्या दिवसापासूनच वेगळे राहिल्यास उत्तम.

◆यामुळे इतरांना संसर्ग होण्याची शक्यता कमी होऊ शकते. ◆यासाठी घरातही मास्क वापरावा.

◆घर छोटे असल्यास एका ठराविक कोपऱ्यात बसावे-झोपावे-जेवावे.तिथे शक्य असेल तर तात्पुरते पार्टीशन लावून आडोसा करता येईल.

◆ तसेच भाग दोन मध्ये सविस्तर सांगितलेले स्वविलगीकरणासाठी सांगितलेले स्वच्छतेचे नियम पाळावेत. 

◆टॉयलेटला जाऊन आल्यानन्तर 1% सोडियम हायपोक्लोराइट फवारावे. मग थोडया वेळाने इतरांनी वापर करावा.


  1. आहार कसा असावा? ©samanwayaDrSnigdha

बऱ्याचदा आजारपणात ताकद येण्यासाठी भरपूर नाश्ता-जेवण करण्याचा सल्ला दिला जातो. पण आयुर्वेदानुसार ताप आला असताना भूक मंदावते,तोंडाला चव नसते असे लक्षण दिसते. आणि भूक लागत नसल्यास लंघन म्हणजे उपवास करावा असे सांगितले आहे.

◆अर्थात हे लंघन उपचारांचा भाग असल्याने वैद्यांच्या सल्ल्यानेच करावे.

◆भूक पुरेशी लागत नसेल पण उपवासही सोसत नसेल तर तांदळाची पेज,मऊ भात, मुगाचे कळण,लाह्या,डाळ-तांदुळाची खिचडी असा पचायला हलका आहार घेता येईल.

◆असा आहार भूक लागेल तेव्हा आणि भूक भागेल तेवढ्याच प्रमाणात घ्यायचा.


  1. फुप्फुसांची क्षमता कशी वाढवायची?

◆फुप्फुसांची क्षमता वाढवण्यासाठी सर्वप्रथम धूम्रपान बंद करावे.तसेच प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्षपणे धुराशी येणारा संबंध टाळावा. 

◆घरातील धूळ,धूर,बुरशी दूर करून स्वच्छता राखावी.

◆ताजे सकस अन्न घ्यावे.

◆नियमित शारीरिक व्यायाम करावा.

◆नियमित श्वसनाचे व्यायाम, प्राणायामाचे प्रकार करावेत. हे सर्व व्यायाम प्रकार अनुभवी तज्ञ व्यक्तींकडून शिकून घ्यावे.टीव्ही,विडिओ पाहून स्वतःच्याच मनाने करू नये.

अजूनही काही शंका असतील तर आपण प्रश्न जरूर विचारू शकता.

स्वविलगीकरण या विषयावर लिहिलेली 3 भागांची लेखमाला खाली सविस्तर वाचा,

भाग १ - https://www.facebook.com/538889016257642/posts/2195116127301581/

भाग २ - https://www.facebook.com/538889016257642/posts/2197070703772790/

भाग ३ - https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2198121820334345&id=538889016257642

लेखिका

डॉ. स्निग्धा चुरी-वर्तक. 

samanwayaayurveda@gmail.com 

(सदर लेख वैद्य स्निग्धा चुरी-वर्तक यांनी ०२ ऑगस्ट 2020 रोजी आपल्या https://samanwayayurved.blogspot.com/2020/08/faqs.html या ब्लॉगवर प्रथम प्रकाशित केला. याचे सर्व अधिकार लेखकाधिन आहेत. इतरत्र शेअर करायचे असल्यास कृृपया कोणतेही बदल न करता व मूळ लेखिकेच्या नावासहित शेेेअर करावा.)



Sunday, 26 July 2020

होम आयसोलेशन / घरीच स्वविलगीकरण कसे करावे? - भाग 1 , 2


सध्याच्या परिस्थितीत बऱ्याचदा ऐकू येणाऱ्या संज्ञा  म्हणजे ‘संस्थात्मक विलगीकरण (इन्स्टिट्यूशनल क्वारंटाईन.) आणि ‘होम आयसोलेशन’.यातील ‘संस्थात्मक विलगीकरण’ सर्वांच्या परिचयाचे झाले आहे. पण ‘होम आयसोलेशन’बाबत काहीजणांनी विचारणा केली होती. नक्की कसे असते हे ‘होम आयसोलेशन ? कोण करू शकेल ?आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट घेऊ शकतो का हो, होम आयसोलेशन मध्ये एखादा रुग्ण असेल तर? हे   प्रश्न आपल्या मनात येतात आणि त्यासाठीच आपण आज हा विषय समजून घेणार आहोत. पण हे समजण्यासाठी मुळात आयसोलेशन (Isolation ) आणि क्वारंटाईन (Quarantine) या दोन संज्ञांतील फरक समजून घ्यावा लागेल. 

आयसोलेशन (Isolation ) म्हणजे  संसर्गजन्य आजाराने बाधित/आजारी व्यक्तीला स्वस्थ व्यक्तींपासून दूर  ठेवणे आणि त्यांचे औषधोपचार करणे. 

Quarantine (क्वारंटाईन ) म्हणजे संसर्गजन्य विषाणू जीवाणूच्या संपर्कात आलेल्या माणसांना वेगळे ठेवून त्यांच्यात आजाराची काही लक्षणे दिसतात का ते तपासणे. क्वारंटाईन हा आयसोलेशन चा सौम्य प्रकार आहे. कारण या प्रकारच्या विलगीकरणात व्यक्ती बाधित असेलच असे नाही. 


स्वविलगीकरण कोणी करावे?

१. रिपोर्ट पॉसिटीव्ह आलेल्या पण कोणतीही लक्षणे नसलेल्या (Asymptomatic Positives ) व्यक्ती. 

२. सौम्य ते मध्यम स्वरूपाची लक्षणे असलेले रुग्ण.

३. कोरोना चाचणी सकारात्मक आलेल्या व्यक्तीच्या संपर्कात आलेल्या व्यक्ती. (Contacts), उदा. - 

  • COVID १९ बाधित रुग्णासोबत एकाच घरात राहणारे कुटुंबीय. 

  • अशी व्यक्ती जी कोरोनाबाधित  रुग्णाच्या संपर्कात असताना PPE कीट  वापरत नव्हती / त्यांचे परिधान केलेले PPE किट खराब झाले होते. 

  • अश्या व्यक्ती ज्यांचा COVID १९ बाधित रुग्णाशी १ मीटरपेक्षा कमी अंतरावरून संपर्क आला आहे किंवा ज्यांना COVID १९ रुग्णासोबत एखाद्या बंदिस्त जागेमध्ये राहावे लागले, जसे की  विमानप्रवास , वाहनप्रवास अथवा ऑफिस अश्या बंदिस्त जागा.  

  •  माझे वैयक्तिक मत असे आहे की जे मी माझ्या रुग्णांना पूर्वीही सांगत होते आणि सध्याच्या काळात तर ते खास गरजेचे आहे, की  इतर कारणांमुळेही वायरल ताप-सर्दी-खोकला असल्यास  इतरांपासून वेगळे राहावे. असे केल्यास आपल्यासोबत घरात राहणाऱ्या कुटुंबियांना , विशेषतः वृद्धांना याचा त्रास होणार नाही. बऱ्याचदा असे दिसून येते की  RT-PCR टेस्टचा निकाल येईपर्यंत रुग्णाने विलगीकरण केलेले नसेल तर घरातील इतर सदस्यांनाही लागण झालेली असू शकते.  

४. सगळ्यात महत्त्वाचे हे समजून घ्यायला हवे की कोरोना इन्फेक्शन म्हणजे काही लाजिरवाणी गोष्ट नाही की सगळ्यांपासून लपवायला हवी. उलट सुरुवातीलाच लक्षणे दिसू लागल्यावर योग्य औषधोपचारासोबत स्वविलगिकरण आणि पूर्ण विश्रांती घेतली तर लवकर  बरे होण्यास मदतच होईल.

स्वविलगीकरण कोणाला करता येणार नाही?

  • असे पेशंट ज्यांची रोगप्रतिकारक क्षमता कमी  आहे. उगा. - कॅन्सर झाला असल्यास अथवा ट्रीटमेंट सुरु आहे किंवा अवयव प्रत्यारोपणाची (ऑर्गन ट्रान्सप्लांट )ची शस्त्रक्रिया झाली असून त्याविषयीची औषधे सुरु आहेत, HIV बाधित व्यक्ती. (कारण अश्या केसेसमध्ये आजारामुळे तसेच चालू असलेल्या औषधांमुळे व्यक्तीची प्रतिकारशक्ती कमी झालेली असते,ऑर्गन ट्रान्सप्लांट झाले असल्यास नवीन अवयव शरीराकडून नाकारला जाऊ नये यासाठी प्रतिकारशक्ती कमी करणारी औषधे चालू असल्यास, त्यातच इतर कुठलेही इन्फेक्शन त्रासदायक होईल. त्यामुळे डॉक्टरांच्या देखरेखीखाली असल्यास उत्तम.

  • ६० वर्षावरील ज्येष्ठ नागरिक तसेच उच्चरक्तदाब (High BP ), मधुमेह, हृदयविकार , फुफ्फुसे-यकृत-किडनी च्या संबंधी काही त्रास असल्यास , चेतासंस्थेचे विकार (या सर्वांना  को -मॉर्बिड स्थिती असे मानतात.) असलेल्या व्यक्ती , यांनी स्वविलगीकरण करण्या आधी सर्व नियम. स्वतःची शरीरस्थिती आधी वैद्यकीय अधिकाऱ्याकडून नीट तपासून घ्यावी. मगच स्वविलगीकरणाचा निर्णय घ्यावा. 


 

किती दिवस करावे?


आपल्या डॉक्टरांनी सांगितल्याप्रमाणे १४ ते १७ दिवस स्वविलगीकरण करावे.  कारण तुम्ही एखाद्या बाधित व्यक्तीच्या/या संपर्कात आल्यास साधारणतः १४ दिवसांमध्ये लक्षणे उत्त्पन्नहोऊ शकतात. तसेच इन्स्टिट्यूशनल आयसोलेशनमध्ये असलेल्या व्यक्तींना जर सलग १० दिवस लक्षणांमध्ये वाढ नसेल आणि शेवटचे सलग ३ दिवस ताप नसेल तर रजा  मिळू शकते , मात्र या व्यक्तींनी घरी पुढे ७ दिवस स्व विलगीकरण करून स्वतःची लक्षणे तपासणे अपेक्षित आहे. 


स्वविलगीकरण करताना कुठल्या सोयी उपलब्ध असणे गरजेचे?


  • सर्वप्रथम घरामध्ये स्वतंत्र टॉयलेट - बाथरूमची जोडणी असलेली खोली (शय्यागृह) असावे. (master bedroom ) 

  • स्वविलगीकरणात असलेल्या रुग्णाची काळजी घेण्यासाठी २४ तास केअरटेकर उपलब्ध असणे आवश्यक आहे. केअरटेकर म्हणजे घरातील सदस्य/शेजारी अथवा व्यावसायिक पद्धतीने हे काम करणाऱ्या व्यक्तीही असू शकतात पण त्या रुग्णासाठी  २४ X  ७ उपलब्ध असणे गरजेचे. आणि हे काम एकाच व्यक्तीने करावे. 

  • रुग्ण, केअर टेकर व रुग्णालय यांच्यात उत्तम समन्वय व सतत संपर्क असायला हवा.

  • रुग्ण व केअरगिव्हर यांना  PPE किट (किमानपक्षी चांगले 3 ply मास्क आणि ग्लोव्हस यांचा पुरेसा पुरवठा असावा.) 

  • रुग्णाने रोज स्वतःही आपली तपासणी करून वैद्यकीय अधिकाऱ्यांना रोजच्या रोज कळवावे . 

  • यासाठी  एक थर्मोमीटर , १ पल्स ऑक्सिमीटर घरी आणल्यास आपल्या रक्तातील ऑक्सिजन चे प्रमाण , तापमान नियमितपणे तपासता येईल . (हे खूप उपयोगी होऊ शकते हे एक वैद्य म्हणून माझे मत आहे.)

  • कोणती लक्षणे तपासावीत -
    १. ताप - खोकला
    २. श्वास घेण्यास त्रास होणे.
    ३. छाती जड  वाटणे किंवा छातीत वेदना होणे.
    ४. रक्तातील ऑक्सिजनचे प्रमाण कमी होणे. (यासाठी पल्स  ऑक्सिमीटर आवश्यक असतो.)
    ५. उत्साह न वाटणे,
    ६.  गोंधळल्यासारखे होणे. 

७. चक्कर येणे / तोल जाणे. 

८. गाळून गेल्याप्रमाणे वाटणे. 

९. ओठ किंवा चेहऱ्यावर निळसर झाक. 

  • Happy hypoxia  (हॅपी हायपॉक्सिया सिंड्रोम) - ही संज्ञा अपल्यापैकी कोणी वाचली आहे का? काही COVID बाधित रुग्णांमध्ये हे लक्षण दिसते. हायपॉक्झिया म्हणजे रक्तातील कमी झालेली ऑक्सिजनची पातळी. आणखी सोप्या शब्दांत सांगायचे झाले तर आपल्या शरीरातील अवयवांना ऑक्सिजनचा पुरेसा पुरवठा होत नसल्याचे हे लक्षण आहे. असे होत असेल तर वर नमूद केलेली लक्षणे दिसू शकतात. *हॅपी हायपॉक्झिया* या अवस्थेत असे काही दिसत नाही. रुग्ण व्यवस्थित , विनातक्रार आपली कामे पार पाडत असतो. मात्र ऑक्सिजनची पातळी कमी झालेली असल्यामुळे शरीर अवयावांवर ताण येत असतो. ज्यामुळे अचानक तातडीची गंभीर स्थिती निर्माण होऊ शकते. हे असे नक्की का होत असावे यामागचे कारण अजून कळलेले नाही पण हे लक्षण दिसत आहे हे मात्र खरे.

    यामुळेच पल्स ऑक्सिमीटर सारख्या यंत्राच्या वापराने आपली रक्तातील ऑक्सिजनची पातळी तपासावी.

स्वविलगीकरण करताना काय खबरदारी घ्यावी?


  • रुग्णाने घरातही मास्क वापरावा. खोलीत एकटे असताना नाही वापरला  तरी चालेल पण जर खोलीत इतर कोणी असेल तर मास्क वापराने बंधनकारक आहे. मास्क दार ६ ते ८ तासांनी बदलावा. /भिजल्यास किंवा खराब झाल्यास त्वरित बदलावा. 

  • रुग्णाच्या सर्व वस्तू वेगळ्या ठेवाव्या. (अंथरूण -पांघरूण ,टॉवेल,नॅपकिन,रुमाल,कपडे,जेवणाची भांडी,पाण्याचे जग )

  • शक्यतो लक्षणे नसल्यास स्वतःची हलकी कामे स्वतःच केल्यास विरंगुळा होतो. (नियमित दिनचर्येसोबतच लक्षणांसाठी  निरीक्षण करतच राहावे) 

  • रुग्णाने आपले कपडे स्वतःच धुवून निर्जंतुक करावे व  खोलीतच वेगळ्या जागी वाळत  घालावे.

  • तसेच भांडी सुद्धा स्वतःची स्वतः घासून ठेवावी. 

  • लक्षणे जास्त असल्यास किंवा ही  कामे स्वतःची स्वतः करणे शक्य न झाल्यास कपडे , भांडी १% सोडियम हायपोक्लोराइटच्या द्रावणात  वेगवेगळे भिजवून ठेवावे.असे कपडे व भांडी  नंतर केअर टेकरनी  वेगळे धुवावे . 

  • बाधित व्यक्तीने वापरलेल्या वस्तू धुताना केअर गिव्हर नी  पूर्ण PPE किट परिधान करावे. 

  • बाधित व्यक्तीची खोली साफ करण्यासाठी जातानासुद्धा केअर गिव्हर नी  पूर्ण PPE किट परिधान करावे.

  • PPE किट घालण्यापूर्वी व काढल्यानन्तर ४० सेकंदांपर्यंत साबणाने हात धुवावेत. 

  • वापरलेले मास्क , PPE किट १% सोडियम हायपोक्लोराइटच्या द्रावणात भिजवून मग खोलवर गाडावे किंवा जाळून टाकावे. (वापरलेले मास्क पुन्हा विकले जात असल्याचा तसेच या मास्कमुळे इन्फेशन पसरत असल्याचा संदर्भ लक्षात घेतला तर या मुद्द्याचे गांभीर्य लक्षात येईल.)

  • खोली साफ करताना लादी, दरवाज्याचे मूठ/कडी  (हॅन्डल) जंतुनाशक-साबणपाण्याने (१% सोडियम हायपोक्लोराइटने) धुवून , पुसून घ्यावे. फोन्स अल्कोहोलयुक्त सॅनिटायझरने पुसावे.

  • अंथरूण-पांघरूण झटकू नये. 

  • COVID बाधित रुग्णाचा कचरा वेगळा ठेवावा. तो रोजच्या कचऱ्यात मिसळू नये. 

  • शक्यतो हा कचरा एका पिशवीत गोळा करून ती पिशवी पुन्हा दुसऱ्या पिशवीत घट्ट बांधावी. आणि हा कचरा पिवळ्या रंगाच्या/या पिशवीत बांधून द्यावा. (जरा ओला कचरा हिरव्या पिशवीत व सुका कचरा लाल पिशवीत द्यायचा असतो तसाच COVID १९ बाधित व्यक्तीचा कचरा पिवळ्या पिशवीत द्यावा. हे आपल्यासाठी, आपल्या शेजाऱ्यांसाठी तसेच कचरा हाताळणाऱ्या लोकांच्या/आहि सुरक्षेसाठी आहे.)

  • घरीच विलगीकरण असले तरीही ते गांभीर्याने पाळावे. नियम मोडून इतरांमध्ये मिसळू नये. अगदी घरच्यांशी सुद्धा नाही.(चौकशी करण्यासाठी विलगीकरणाच्या खोलीत जाऊ नये.) 

  • औषधे आणायला किंवा सामान आणायला बाहेर जाऊ नये, घरात एकटेच राहत असलात तरीही. 

 

खालील मुद्द्यांविषयी माहिती घेऊ पुढील भागात -

केअर गिव्हर आणि कुटुंबीयांनीसुद्धा  विलगीकरण करावे का?

होम आयसोलेशन आणि मानसिक स्वास्थ्य - 

COVID 19 ची ट्रीटमेंट आणि आयुर्वेद -